रक्षाबंधन Rakhi कब है ?

हिन्दू धर्म शास्त्रों में रक्षाबंधन को भाई-बहन के प्रेम का अटूट बंधन वाला त्योहार कहा गया है। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस साल रक्षाबंधन पर रवि योग पड़ रहा है जिससे कि इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषशास्त्र की मानें तो यह योग शुभ है। यह योग सारे दुष्प्रभावों को खत्म करता है और भाई बहन के रिश्ते को किसी की नजर नहीं लगती।
इस बार रक्षाबंधन किस दिन पडे़गा इस बात को लेकर लोगों में संशय बना हुआ है। यह त्योहार सावन के महीने पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। श्रावण पूर्णिमा या कजरी पूर्णिमा को रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा रही है। यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है जिसे मध्यकालीन भारत में राखी कहा जाने लगा। मान्याताओं के अनुसार राखी में भद्रा काल का ध्यान रखा जाता है। इस काल में राखी बांधने से रिश्तों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

रक्षाबंधन Rakhi कब है ?

वर्ष 2023 में रक्षाबंधन कब है ?

हिन्दू पंचाग के अनुसार इस बार सावन 59 दिनों का होने जा रहा है। ऐसा संयोग सालों के बाद बन रहा है।
पंचांग के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन पर्व 30 अगस्त को मनाया जाएगा। हालांकि रक्षाबंधन के दिन इस बात का ख्याल रखना चाहिए की भद्रकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए, भद्रकाल को शुभ मुहूर्त नहीं है।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब है ?
पौराणिक मान्यता के अनुसार राखी बांधने के लिए दोपहर का समय शुभ होता है, लेकिन यदि दोपहर के समय भद्रा काल हो तो फिर प्रदोष काल में राखी बांधना शुभ होता है.
रक्षाबंधन 2023 राखी बांधने का मुहूर्त पंचांग के अनुसार, हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि के दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है. सावन पूर्णिमा तिथि का आरंभ 30 अगस्त 2023 को प्रातः 10:59 मिनट से होगी. पूर्णिमा तिथि के साथ ही भद्रा आरंभ हो जाएगी जो कि रात्रि 09:02 तक रहेगी. शास्त्रों में भद्रा काल में श्रावणी पर्व मनाने का निषेध कहा गया है तथा इस दिन भद्रा का काल रात्रि 09:02 तक रहेगा।

अपने घरों मेर राखी का त्यौहार कैसे मनाएं ?
सबसे पहले सुबह उठकर नाहा धोकर मंदिर जाएँ और अपनी अपनी बहनो के जिंदगी में सुख शांति समृद्धि के लिए भगवान से मन्नतें मांगे। आप चाहें तो इस दिन उपवास भी रह सकते हैं , क्यों नहीं , साल में एक बार त्यौहार जो आनी है ,अपनी बहनो के लिए एक दिन उपवास तो रह ही सकते है। उपवास मतलब पूरा दिन नहीं जब तक अपनी बहनो से राखी न बंधवा लें तब तक उपवास रहने से आपसी प्रेम भाव मजबूत होता है।

मानव जीवन में हर पुरुष की कोई न कोई बहन होती है चाहे वो सगी बहन हो या चचेरी।
इस दिन को अपनी बहनो से राखी बंधवाने के लिए लोग दूर दूर से चलकर अपने घरों को आते हैं ।
भाई अपनी बहनो के लिए ढेर सारी गिफ्ट भेंट देते हैं जैसे की कपड़े , गहनें , मोबाइल फ़ोन , वाच , हेड फ़ोन , इत्यादि।

Diwali festival Essay (दिवाली)

परिचय

Diwali Festival का नाम सुनते ही लोगों में उमंग , जोश , ताजगी आ जाती है। दिवाली को दीपावली या दीपोत्सव भी कहा जाता है। यह नाम संस्कृत शब्द दीपावली से लिया गया है, जिसका अर्थ है “रोशनी की पंक्ति।” यह त्योहार आम तौर पर अंधेरे पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। यह हर साल अक्टूबर या नवंबर के महीने में पड़ता है। दिवाली पुरे भारतवर्ष में बड़े ही हर्षोल्लाष के साथ मनाया जाता है। दिवाली पूर्वांचल में लगभग 6 दिनों तक रहता है। जैसे कि पूर्वी उत्तर प्रदेश , बिहार झारखण्ड छत्तीसगढ़ में दिवाली 6 दिनों तक रहता है। हिंदू धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म में प्रमुख धार्मिक त्योहारों में से एक है, जो चंद्र माह अश्विन के अंधेरे आधे के 13 वें दिन से चंद्र माह कार्तिक के प्रकाश आधे के दूसरे दिन तक पांच दिनों तक चलता है। हिंदुओं में धन की देवी लक्ष्मी और गौरी गणेश की पूजा की जाती है। दिवाली की तैयारी महीने भर पहले से शुरू हो जाती है। घरों की साफ सफाई ,पेंटिंग , साज सजावट तेल से भरे छोटे मिट्टी के दीपक जलाने की प्रथा सबसे प्रसिद्ध है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार दिवाली के त्यौहार को इसलिए मनाया जाता है की 14 वर्ष के वनवास और रावण का वध करके भगवान श्री राम अपने जन्मभूमि अयोध्या लौटे थे। इसलिए वहां के लोगो के द्वारा इस दिन घी के दिए जलाये गए थे, तब से ही दिवाली का त्यौहार प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।

भारत में हिंदू त्योहार दिवाली के दौरान लोग पारंपरिक मिट्टी के दीपक जलाते हैं। बंगाल में देवी काली की पूजा की जाती है। उत्तर भारत में यह त्योहार राक्षसों के राजा रावण को हराने के बाद राम (सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ) की अयोध्या शहर में शाही घर वापसी का जश्न भी मनाता है घर के अंदर और बाहर फर्श को रंगोली बनाई जाती है।  जिसमें रंगीन चावल, रेत या फूलों की पंखुड़ियों से बने विस्तृत डिज़ाइन किये जाते हैं।

दिवाली को अलग-अलग दिनों के नाम और परंपरा इस प्रकार है।
पहला दिन धनतेरस > जिसे धनतेरस के नाम से जाना जाता है, घरों की सफाई और सोने या चांदी की छोटी बड़ी वस्तुएं खरीदने की परंपरा है।
दूसरा दिन दिवाली> जिसे नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली कहा जाता है कृष्ण द्वारा नरकासुर के विनाश की याद दिलाता है।
तीसरे दिन लक्ष्मी पूजा> परिवार अपनी समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए लक्ष्मी से आशीर्वाद मांगते हैं दीये, मोमबत्तियाँ और आतिशबाजी जलाएं और मंदिरों के दर्शन करते हैं।
चौथा दिन गोवर्धन पूजा> जिसे गोवर्धन पूजा के नाम से जाना जाता है, देवताओं के राजा इंद्र को कृष्ण की हार की याद दिलाता है, कार्तिक का पहला दिन और विक्रम (हिंदू) कैलेंडर में नए साल की शुरुआत भी है। इस दिन के बाद लोग शादी विवाह एवं शुभ कार्य शुरू कर देते हैं।
पाँचवाँ दिन भाई दूज> जिसे भाई दूज भाई टीका या भाई बिज कहा जाता है, भाइयों और बहनों के बीच के बंधन का जश्न मनता है। उस दिन बहनें अपने भाइयों की सफलता और सलामती के लिए प्रार्थना करती हैं।
छठवां दिन जिसे छठ पूजा> जिसे लोग छठ पूजा के नाम से जानते है। इस दिन बाल बच्चे वाली महिलाएं अपने पुत्र के लंबी उम्र के लिए निर्जला ब्रत रखती हैं। निर्जला मतलब बिना पंनी पिए 24 घंटे तक उपवास रहती हैं। अगले दिन सुबह उगते सूर्य को दूध या साफ पानी का अर्घ दिया जाता है उसके बाद ही महिलाएं ब्रत खोलती हैं।

दिवाली आम तौर पर घूमने-फिरने, एक दूसरे को गिफ्ट करने, नए कपड़े पहनने, दावत देने, गरीबों को खाना खिलाने और आतिशबाजी करने का समय है। हालाँकि अलग अलग राज्यों में सरकारें पटाखे फोड़ने अतिशवादी करने प्रदुषण फैलाने पर प्रतिबन्धित करती हैं। स्वच्छ वातावरण बनाना हमारा कर्त्तव्य होना चाहिए।

दीपावली कब मनाई जाती है

दीपावली भारत वर्ष में कैसे मनायी जाती है

दीपावली (Deepawali) का महत्व

दीपावली (Deepawali)पर अभद्र व्यवहार न करें

विदेश में दिपावली का स्वरूप

दिवाली में किसकी पूजा की जाती है ?

  1. दीपावली हिंदूओ का प्रमुख त्यौहारों में से एक है।
  2. दिवाली का भारत की संस्कृति तथा परम्परा को दर्शाता है।
  3. दिवाली को दीपकों का त्यौहार भी कहा जाता है, मिट्टी के दीये जलाये जातें हैं।
  4. दीपावली श्री राम 14 साल के वनवास काटकर अयोध्या लौटने की ख़ुशी तथा उनके स्वागत में मनाई जाती है।
  5. भगवान श्री राम के वापिस अयोध्या लौटने की खुशी में वहां के लोगों ने इस दिन को दीवाली के रूप में मनाया।
  6. दिवाली का त्यौहार हर साल कार्तिक मास में आता है।
  7. दीवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है ताकि घर में ऋद्धि- सिद्धिं बनी रहे।
  8. दीपावली में सभी लोग अपने घरों को अनेक प्रकार की रंग बिरंगी लाइटों से सजाते हैं।
  9. दीपावली के दिन पटाखे, फुलझड़ी, आदि जलाकर हर्सोल्लास मनाया जाता
  10. दीवाली की शाम सभी लोग अपने आस पड़ोस अपने रिश्तेदारों को मिठाइयां बांटते हैं।

क्या भारत के अलग-अलग राज्यों में दिवाली को एक ही रूप में मनाया जाता है ?

नहीं प्रत्येक राज्य के द्वारा अलग-अलग रूप में दिवाली के त्यौहार को मनाया जाता है।

दीपावली में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है ?

माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का दीपावली में एक विशेष महत्व है, क्युकी माँ लक्ष्मी धन की देवी है एवं भगवान् गणेश बुद्धि एवं विवेक, धन का सदुपयोग करने के लिए विवेक का होना अति आवश्यक है। इसलिए इस दिन लक्ष्मी जी और भगवान् गणेश जी की पूजा की जाती है।

वर्ष 2023 में दीपावली का त्यौहार कब मनाया जायेगा ?

12 नवम्बर 2023 को दीपावली का त्यौहार मनाया जायेगा।

दिवाली पर निबंध कैसे लिखें ?